आज कल के हालात : सावन

 ज़िंदगी उस मुकाम पे आ गई है जहां अगर मैं एक तरफ से कुछ बटोर रहा हूं तो तो तीन तरफ से बिखर रहा है, समझ नहीं आ रहा की चल क्या रहा है, 1 घंटा खुश रह लूं तो अगले 2 घंटे परेशान या उलझ जा रहा हूं अब तो डर लग रहा की अब आगे क्या होगा, लोग फ्यूचर प्लान कर रहे है, मैं अपना दिन का एक घंटा नही प्लान कर पा रहा हूं, सोचता कुछ हूं, हो कुछ और जा रहा है, मेरे काम उलझे ही रह जा रहे है, मैं कही और उलझा रह जा रहा हूं।

रो सकता नही, हँसा जा नहीं रहा, ख्वाब तो दूर की बात है सुकून की जिंदगी तक जिया नही जा रहा की चलो ख्वाब को समेट लिया चैन की 2 रोटी खाते है पर मयस्सर तो वो भी नही है।

पेज तक पे भी आना नहीं हो पा रहा इस कदर खुद में उलझा हुआ हू मै।

एक दिन सब सही होगा इस उम्मीद में एक दिन गुज़र हो रहा है, देखते है कब तक सब सही होगा ।


सबको महादेव रहेगा पेज पे वक्त ना देने के लिए क्षमा चाहूंगा


सावन

टिप्पणियाँ

Advertisement

Contact Us

भेजें