मैं, लपकझुन्ना और हमारा प्रेम : सावन
लोगों की जिंदगी अपने हिसाब से दौड़ रही है और समय उसका प्रतिनिधित्व कर रहा है हम चाह के भी कुछ नहीं कर सकते ना ही पा सकते है जब तक हमारी क़िस्मत साथ ना दे, चलो मान लिए क़िस्मत साथ ना दे तो कोई कुछ ना मिले, पर क़िस्मत ने हमें उससे मिलवाया है, क़िस्मत ने चाहा तो वो मेरी जिंदगी में आई, वो भी उतना ही प्यार करती है जितना मैं उससे करता हूं पर अब मैं किस्मत के भरोसे नहीं न बैठ सकता, मैं अपने घर वालो को मनाया उन्हें एहसास दिलाया की वो मेरे लिए परफेक्ट है मैं क़िस्मत को बदलने में आधा सफलता पाया, मैने अपने रूढ़िवादी परंपरा को मानने वाले ब्राह्मण परिवार को मनाया जिसने कभी सोचा नहीं था की उनका बेटा ऐसा कुछ करेगा वो माने न क्योंकि उनका वारिश ही जीवन भर ऐसे के साथ रहे जो स्वजातीय तो है पर बेटे के ऊपर थोप दी गई हो, मैने अपने घर वालो को मनाया वो मान गए, उन्होंने अपने बेटे की खुशी देखी, पर मैं एक शख्स को अब भी नही मना पाया वो है हमारी लपकझुन्ना के पिताजी, वो मान जाएंगे इतना भी बुरा इंसान नही हूं एक बार बात तो करे तब न सही और गलत की पहचान करेंगे, तब न समझेंगे कि लड़का सही है या गलत। पर नहीं उनको तो समाज का भय है, कौन सा समाज और समाज का क्या समाज के लिए जीवन भर कुछ भी कर दो वो खामियां निकालता ही रहेगा, खैर मना रहा हूं उनके एक बच्चे की तरह मान जाएंगे, क्योंकि उनकी बेटी को उनकी ही तरह प्रेम करता हूं उसे किसी तरह का दुःख ना होने दूंगा, कभी मौका मिले तो हालात अपने बताऊं मान जाएंगे तब है तो वो भी एक पिता ही न बस महादेव जी हमारे जिंदगी का मार्गदर्शन करते रहे और आशीर्वाद देते रहे।
सावन
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