मैं, लपकझुन्ना और हमारा प्रेम 3 : सावन
सुप्रभात सभी को, और लपकझुन्ना तुमको भी प्यारा सा good morning ♥️
मैं जानता हूं की सब कुछ जितना अच्छा चलना चाहिए नही चल रहा है, यूं कहूं तो अच्छा ही नही चल रहा है फिर भी तुम्हारी यादों के सहारे चला रहा हूं, सुबह 7 बजे का जगा हू, पूरी रात सोया नही हूं आज कल नींद बहुत कम आ रही है लगातार सर में दर्द भी रह रहा है वैसे तो महाराज जी कह रहे है की डॉक्टर को दिखा लो पर उन्हें कौन समझाए कि डिप्रेशन का दर्द है ये, पर बाप तो बाप होता है उनका ज़िद है की दिखा लो, वैसे एक घंटे तुम्हारी अच्छी यादों के साथ सारे काम निपटा लिए, पर अब फुर्सत में बैठा हूं, और उसके साथ कुछ डर भी मेरे जेहन में आने लगे है क्या करूं पसंदीदा शख्स को खोने का डर हमेशा रहता है, मैं जानता हूं की मैं तुम्हे नही खोऊंगा ना तुम मुझे फिर भी इतनी दूर है हम की हमारा डर हमेशा हम पे हावी रहेगा। एक रोज हम साथ होंगे उस दिन हमारा पूरा परिवार भी साथ होगा देखना बाबा विश्वनाथ जी हमेशा हमारे प्रेम की रक्षा करेंगे।
इस व्रत का तीसरा दिन है माता रानी से एक ही मिन्नत है की वो मुझे, तुमको दे दे, और हां तुम अपना खयाल रखना और अपने पापा मम्मी और भाई का भी
तुम्हारे इंतज़ार में अनंत तक का सफर में
तुम्हारा सावन
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